#sampadakexpress सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने बुधवार को एक अहम टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि भारत एक संवैधानिक लोकतंत्र है जहां बहुमत का शासन है, लेकिन बहुसंख्यकवाद संवैधानिकवाद पर हावी नहीं हो सकता है. साथ ही कहा कि अदालतों को संवैधानिक सिद्धांतों के आधार पर निर्णयों का परीक्षण करना चाहिए. अदालत की इस टिप्पणी को इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि देश की कई निचली अदालतों ने बहुसंख्यकवाद को ध्यान में रखते हुए फैसले सुनाए हैं. सबरीमाला मामले की सुनवाई जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने ये टिप्पणी की हैं. जिसमें भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे से संबंधित सात बड़े कानूनी प्रश्न शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामलों में न्यायिक समीक्षा का दायरा बहुत सीमित है. न्यायालयों को सामान्यतः इस विषय को विधायिका पर छोड़ देना चाहिए. जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह दलील स्वीकार्य नहीं है. इसका मतलब यह है कि सिर्फ बहुसंख्यकवाद के कारण, हमें ऐसा नहीं करना चाहिए? मेहता ने बहुसंख्यकवाद शब्द के प्रयोग पर सवाल उठाया. कहा-मुझे खेद है, यह लोकतंत्र है. लोकतंत्र का अर्थ है बहुमत है. मामले पर सुप्रीम कोर्ट में कल भी सुनवाई जारी रहेगी.#Supremecourt #majoritarianism #sabarimala #constitutionalprinciples #newsfeed2025 #newstoday2025 #NewsUpdate

#sampadakexpress सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने बुधवार को एक अहम टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि भारत एक संवैधानिक लोकतंत्र है जहां बहुमत का शासन है, लेकिन बहुसंख्यकवाद संवैधानिकवाद पर हावी नहीं हो सकता है. साथ ही कहा कि अदालतों को संवैधानिक सिद्धांतों के आधार पर निर्णयों का परीक्षण करना चाहिए. अदालत की इस टिप्पणी को इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि देश की कई निचली अदालतों ने बहुसंख्यकवाद को ध्यान में रखते हुए फैसले सुनाए हैं. सबरीमाला मामले की सुनवाई जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने ये टिप्पणी की हैं. जिसमें भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे से संबंधित सात बड़े कानूनी प्रश्न शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामलों में न्यायिक समीक्षा का दायरा बहुत सीमित है. न्यायालयों को सामान्यतः इस विषय को विधायिका पर छोड़ देना चाहिए. जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह दलील स्वीकार्य नहीं है. इसका मतलब यह है कि सिर्फ बहुसंख्यकवाद के कारण, हमें ऐसा नहीं करना चाहिए? मेहता ने बहुसंख्यकवाद शब्द के प्रयोग पर सवाल उठाया. कहा-मुझे खेद है, यह लोकतंत्र है. लोकतंत्र का अर्थ है बहुमत है. मामले पर सुप्रीम कोर्ट में कल भी सुनवाई जारी रहेगी.#Supremecourt #majoritarianism #sabarimala #constitutionalprinciples #newsfeed2025 #newstoday2025 #NewsUpdate
#sampadakexpress सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने बुधवार को एक अहम टिप्पणी की. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि भारत एक संवैधानिक लोकतंत्र है जहां बहुमत का शासन है, लेकिन बहुसंख्यकवाद संवैधानिकवाद पर हावी नहीं हो सकता है. साथ ही कहा कि अदालतों को संवैधानिक सिद्धांतों के आधार पर निर्णयों का परीक्षण करना चाहिए. अदालत की इस टिप्पणी को इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि देश की कई निचली अदालतों ने बहुसंख्यकवाद को ध्यान में रखते हुए फैसले सुनाए हैं. सबरीमाला मामले की सुनवाई जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने ये टिप्पणी की हैं. जिसमें भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे से संबंधित सात बड़े कानूनी प्रश्न शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामलों में न्यायिक समीक्षा का दायरा बहुत सीमित है. न्यायालयों को सामान्यतः इस विषय को विधायिका पर छोड़ देना चाहिए. जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह दलील स्वीकार्य नहीं है. इसका मतलब यह है कि सिर्फ बहुसंख्यकवाद के कारण, हमें ऐसा नहीं करना चाहिए? मेहता ने बहुसंख्यकवाद शब्द के प्रयोग पर सवाल उठाया. कहा-मुझे खेद है, यह लोकतंत्र है. लोकतंत्र का अर्थ है बहुमत है. मामले पर सुप्रीम कोर्ट में कल भी सुनवाई जारी रहेगी.#Supremecourt #majoritarianism #sabarimala #constitutionalprinciples  #newsfeed2025 #newstoday2025 #NewsUpdate

Hot this week

Topics

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img
Previous article
#sampadakexpress प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 मई को कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने आचरण से उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए. उन्होंने कहा कि मंत्रियों को उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करना चाहिए, जिसमें आधिकारिक काफिलों में वाहनों की संख्या कम करना भी शामिल है. ऐसे समय में जब ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) को एक टिकाऊ विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है, प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को EV समेत नए वाहनों की अनावश्यक खरीद से बचने की सलाह दी. प्रधानमंत्री मोदी ने उच्च पदों पर बैठे लोगों द्वारा अपनाई गई सादगीपूर्ण आदतों के प्रेरणादायक उदाहरण भी दिए. उन्होंने एक जज के बारे में चर्चा की, जो साइकिल से ही अदालत पहुंचे थे और गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के हाल ही में बस से यात्रा करने का भी जिक्र किया. प्रधानमंत्री ने अपने सहयोगियों से कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के ऐसे कदम समाज को प्रेरित करते हैं. उन्होंने ये भी कहा कि जनप्रतिनिधियों की राष्ट्र और समाज के प्रति अतिरिक्त जिम्मेदारी होती है.#Publicrepresentatives #example #pmmodi #resourcemanagement #EVs  #newsfeed2025 #newstoday2025 #NewsUpdate
#sampadakexpress प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 मई को कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने आचरण से उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए. उन्होंने कहा कि मंत्रियों को उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करना चाहिए, जिसमें आधिकारिक काफिलों में वाहनों की संख्या कम करना भी शामिल है. ऐसे समय में जब ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) को एक टिकाऊ विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है, प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को EV समेत नए वाहनों की अनावश्यक खरीद से बचने की सलाह दी. प्रधानमंत्री मोदी ने उच्च पदों पर बैठे लोगों द्वारा अपनाई गई सादगीपूर्ण आदतों के प्रेरणादायक उदाहरण भी दिए. उन्होंने एक जज के बारे में चर्चा की, जो साइकिल से ही अदालत पहुंचे थे और गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के हाल ही में बस से यात्रा करने का भी जिक्र किया. प्रधानमंत्री ने अपने सहयोगियों से कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के ऐसे कदम समाज को प्रेरित करते हैं. उन्होंने ये भी कहा कि जनप्रतिनिधियों की राष्ट्र और समाज के प्रति अतिरिक्त जिम्मेदारी होती है.#Publicrepresentatives #example #pmmodi #resourcemanagement #EVs #newsfeed2025 #newstoday2025 #NewsUpdate
Next article