#sampadakexpress भागलपुर से नवगछिया को जोड़ने वाली विक्रमशिला सेतु के पिलर नंबर 133 का एक स्लैब गिर जाने से पुल पर आवाजाही पूर्ण रूप से बंद हो गई है. रात में ही जिला प्रशासन की सतर्कता के कारण कोई नुकसान नहीं हुआ और पुल को सील कर दिया गया. यह घटना सोमवार (4 मई) की रात करीब 12 बजकर 50 मिनट की बताई जा रही है.#bihar #bhagalpur #bridgecollapse #vikramshilabridge #pillar133breaks #gangariver #NewsUpdate #viralreels #viralvideostoday #trendingvideo #trendingtopic #trendingnews2024 #TRENDINGNEWSTODAY #reels2024

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#sampadakexpress नेपाल ने भारत और चीन द्वारा लिपुलेख दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा आयोजित किए जाने पर आपत्ति जताई है. उसने कहा है कि 1816 की सुगौली संधि के तहत यह नेपाल का संप्रभु क्षेत्र है. नेपाल के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, उसने कैलाश मानसरोवर यात्रा के बारे में कुछ सवालों और चिंताओं की ओर ध्यान दिलाया है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह यात्रा भारत और चीन के बीच नेपाली ज़मीन, लिपुलेख के रास्ते होती है. इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने नेपाल को करारा जवाब दिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, इस संबंध में भारत का रुख हमेशा से एक जैसा और स्पष्ट रहा है. लिपुलेख दर्रा 1954 से ही कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक पुराना मार्ग रहा है. इस मार्ग से यात्रा दशकों से चली आ रही है. यह कोई नई बात नहीं है. जहां तक ​​क्षेत्रीय दावों की बात है, भारत ने हमेशा यही कहा है कि ऐसे दावे न तो सही हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित हैं.#Nepal #Obstacle #KailashMansarovarYatra #BalenGovernment #Protest  #newsfeed2025 #newstoday2025 #NewsUpdate
#sampadakexpress नेपाल ने भारत और चीन द्वारा लिपुलेख दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा आयोजित किए जाने पर आपत्ति जताई है. उसने कहा है कि 1816 की सुगौली संधि के तहत यह नेपाल का संप्रभु क्षेत्र है. नेपाल के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, उसने कैलाश मानसरोवर यात्रा के बारे में कुछ सवालों और चिंताओं की ओर ध्यान दिलाया है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह यात्रा भारत और चीन के बीच नेपाली ज़मीन, लिपुलेख के रास्ते होती है. इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने नेपाल को करारा जवाब दिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, इस संबंध में भारत का रुख हमेशा से एक जैसा और स्पष्ट रहा है. लिपुलेख दर्रा 1954 से ही कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक पुराना मार्ग रहा है. इस मार्ग से यात्रा दशकों से चली आ रही है. यह कोई नई बात नहीं है. जहां तक ​​क्षेत्रीय दावों की बात है, भारत ने हमेशा यही कहा है कि ऐसे दावे न तो सही हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित हैं.#Nepal #Obstacle #KailashMansarovarYatra #BalenGovernment #Protest #newsfeed2025 #newstoday2025 #NewsUpdate
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