#sampadakexpress पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली में शांति भंग की धाराओं के दुरुपयोग पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि है और बिना वैधानिक प्रक्रिया के किसी निर्दोष को जेल नहीं भेजा जा सकता. न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मंसूर अहमद उर्फ लल्लू की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की. कोर्ट ने मंसूर अहमद को 8 दिनों की अवैध हिरासत के लिए 2 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है. यह राशि दोषी तत्कालीन एसीपी की सैलरी से वसूली जाएगी. प्रयागराज के खीरी इलाके के रहने वाले मंसूर अहमद को बिना किसी उचित कानूनी प्रक्रिया के उठाया गया. मात्र एक प्रोफार्मा आदेश पर उन्हें सीधे जेल भेज दिया गया. हाई कोर्ट ने इस पूरी कार्रवाई को पूरी तरह अवैध करार दिया. कोर्ट ने कहा कि आठ दिन की यह हिरासत किसी भी मायने में कानून के अनुरूप नहीं थी.#Allahabadhighcourt #twolakhrupees #compensation #illegalcustody #UttarPradesh #newsfeed2025 #newstoday2025 #NewsUpdate




