मध्य प्रदेश में फर्जी डॉक्टरों का बड़ा खुलासा, 8 से 10 लाख रुपये में खरीदी गईं नकली MBBS डिग्रियां!मध्य प्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र को झकझोर देने वाले एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जांच में ऐसे कथित डॉक्टरों के नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिन्होंने नकली MBBS डिग्रियों और फर्जी मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन के आधार पर सरकारी नौकरियां हासिल कर लीं। कुछ आरोपियों ने तो असली डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन नंबर तक का इस्तेमाल किया।इस घोटाले का खुलासा सबसे पहले दमोह जिले में हुआ, जहां राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संचालित संजीवनी क्लीनिकों में तैनात तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों की पहचान डॉ. कुमार सचिन यादव, डॉ. राजपाल गौर और डॉ. अजय मौर्य के रूप में हुई है।जांच में सामने आया कि सचिन यादव और राजपाल गौर दमोह के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और संजीवनी क्लीनिकों में कार्यरत थे, जबकि अजय मौर्य जबलपुर के एक संजीवनी केंद्र में डॉक्टर के रूप में सेवाएं दे रहा था। हैरानी की बात यह है कि ये लोग दो वर्षों से अधिक समय तक बिना किसी संदेह के डॉक्टर के रूप में कार्य करते रहे।पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आरोप है कि राजपाल गौर ने वर्ष 2018 के एक पुराने रजिस्ट्रेशन नंबर में हेरफेर कर उसे वर्ष 2023 का दिखाया। जांच में पता चला कि वह नंबर वास्तव में नरसिंहपुर में पदस्थ एक अन्य डॉक्टर का था।अधिकारियों को संदेह है कि फर्जी MBBS डिग्रियां और नकली मेडिकल काउंसिल पंजीकरण 8 से 10 लाख रुपये में खरीदे गए थे। जांच के अनुसार, सचिन यादव के पास BDS (डेंटल) की वास्तविक डिग्री थी, जबकि राजपाल गौर BHMS की योग्यता रखते थे। इसके बावजूद दोनों ने कथित तौर पर संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में डॉक्टर के पद हासिल कर लिए।फिलहाल मामले की जांच जारी है और आशंका जताई जा रही है कि यह नेटवर्क राज्य के अन्य जिलों तक भी फैला हो सकता है।#SampadakExpress #MadhyaPradesh #FakeDoctor #MBBSScam #MedicalScam #HealthScam #Damoh #Jabalpur #NHM #SanjeevaniClinic #BreakingNews #IndiaNews #Corruption #FakeDegree #MedicalFraud #GovernmentJobs #CrimeNews #Investigation #Healthcare #TrendingNews #LatestNews #NewsUpdate




