#sampadakexpress कानपुर में एक ITBP जवान अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचा, जहां उसने मेडिकल लापरवाही पर न्याय की गुहार लगाई. जवान की मां का हाथ गलत इलाज के चलते काटा गया था. तीन दिन से थाने के चक्कर काटने के बाद भी सुनवाई न होने पर जवान ने यह कदम उठाया. कमिश्नर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच और FIR के आदेश दिए हैं.#Uttarpradesh #ITBpJawan #Justice #MotherAmputatedArm #Kanpur #Hospital #NewsUpdate #viralreels #viralvideostoday #trendingvideo #trendingtopic #trendingnews2024 #TRENDINGNEWSTODAY #reels2024

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#sampadakexpress सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में मजदूरों के एक प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए दो प्रदर्शनकारियों के कथित तौर पर पुलिस हिरासत में टॉर्चर किए जाने से जुड़े एक मामले की सुनवाई की. जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन/भुयान की बेंच ने निर्देश दिया कि दोनों आरोपियों को कोर्ट के सामने पेश किया जाए, जिसके बाद कोर्ट ने उनसे सीधे बातचीत की. सुनवाई के दौरान, आरोपियों में से एक ने कोर्ट को बताया कि पुलिस हिरासत में रहते हुए उसे टॉर्चर किया गया था. इस पर जवाब देते हुए, जस्टिस नागरत्ना ने पूछा कि क्या दोनों व्यक्ति इस समय न्यायिक हिरासत में हैं, और टिप्पणी की कि यह याचिका अब असल में एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका में बदल गई है. सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्वेस ने कोर्ट में दलील दी कि, पुलिस द्वारा कथित टॉर्चर को देखते हुए, उन्हें डर है कि पुलिस उनके मुवक्किलों की और हिरासत मांग सकती है. उन्होंने तर्क दिया कि, हालांकि उनके मुवक्किलों से पूछताछ की जा सकती है, लेकिन उन्हें पुलिस हिरासत में नहीं भेजा जाना चाहिए.#SupremeCourt #Arrested #NoidaProtest #CustodialTorture #Resonates  #newsfeed2025 #newstoday2025 #NewsUpdate
#sampadakexpress सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में मजदूरों के एक प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए दो प्रदर्शनकारियों के कथित तौर पर पुलिस हिरासत में टॉर्चर किए जाने से जुड़े एक मामले की सुनवाई की. जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन/भुयान की बेंच ने निर्देश दिया कि दोनों आरोपियों को कोर्ट के सामने पेश किया जाए, जिसके बाद कोर्ट ने उनसे सीधे बातचीत की. सुनवाई के दौरान, आरोपियों में से एक ने कोर्ट को बताया कि पुलिस हिरासत में रहते हुए उसे टॉर्चर किया गया था. इस पर जवाब देते हुए, जस्टिस नागरत्ना ने पूछा कि क्या दोनों व्यक्ति इस समय न्यायिक हिरासत में हैं, और टिप्पणी की कि यह याचिका अब असल में एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका में बदल गई है. सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्वेस ने कोर्ट में दलील दी कि, पुलिस द्वारा कथित टॉर्चर को देखते हुए, उन्हें डर है कि पुलिस उनके मुवक्किलों की और हिरासत मांग सकती है. उन्होंने तर्क दिया कि, हालांकि उनके मुवक्किलों से पूछताछ की जा सकती है, लेकिन उन्हें पुलिस हिरासत में नहीं भेजा जाना चाहिए.#SupremeCourt #Arrested #NoidaProtest #CustodialTorture #Resonates #newsfeed2025 #newstoday2025 #NewsUpdate