#sampadakexpress सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में मजदूरों के एक प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए दो प्रदर्शनकारियों के कथित तौर पर पुलिस हिरासत में टॉर्चर किए जाने से जुड़े एक मामले की सुनवाई की. जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन/भुयान की बेंच ने निर्देश दिया कि दोनों आरोपियों को कोर्ट के सामने पेश किया जाए, जिसके बाद कोर्ट ने उनसे सीधे बातचीत की. सुनवाई के दौरान, आरोपियों में से एक ने कोर्ट को बताया कि पुलिस हिरासत में रहते हुए उसे टॉर्चर किया गया था. इस पर जवाब देते हुए, जस्टिस नागरत्ना ने पूछा कि क्या दोनों व्यक्ति इस समय न्यायिक हिरासत में हैं, और टिप्पणी की कि यह याचिका अब असल में एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका में बदल गई है. सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्वेस ने कोर्ट में दलील दी कि, पुलिस द्वारा कथित टॉर्चर को देखते हुए, उन्हें डर है कि पुलिस उनके मुवक्किलों की और हिरासत मांग सकती है. उन्होंने तर्क दिया कि, हालांकि उनके मुवक्किलों से पूछताछ की जा सकती है, लेकिन उन्हें पुलिस हिरासत में नहीं भेजा जाना चाहिए.#SupremeCourt #Arrested #NoidaProtest #CustodialTorture #Resonates #newsfeed2025 #newstoday2025 #NewsUpdate

#sampadakexpress सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में मजदूरों के एक प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए दो प्रदर्शनकारियों के कथित तौर पर पुलिस हिरासत में टॉर्चर किए जाने से जुड़े एक मामले की सुनवाई की. जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन/भुयान की बेंच ने निर्देश दिया कि दोनों आरोपियों को कोर्ट के सामने पेश किया जाए, जिसके बाद कोर्ट ने उनसे सीधे बातचीत की. सुनवाई के दौरान, आरोपियों में से एक ने कोर्ट को बताया कि पुलिस हिरासत में रहते हुए उसे टॉर्चर किया गया था. इस पर जवाब देते हुए, जस्टिस नागरत्ना ने पूछा कि क्या दोनों व्यक्ति इस समय न्यायिक हिरासत में हैं, और टिप्पणी की कि यह याचिका अब असल में एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका में बदल गई है. सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्वेस ने कोर्ट में दलील दी कि, पुलिस द्वारा कथित टॉर्चर को देखते हुए, उन्हें डर है कि पुलिस उनके मुवक्किलों की और हिरासत मांग सकती है. उन्होंने तर्क दिया कि, हालांकि उनके मुवक्किलों से पूछताछ की जा सकती है, लेकिन उन्हें पुलिस हिरासत में नहीं भेजा जाना चाहिए.#SupremeCourt #Arrested #NoidaProtest #CustodialTorture #Resonates #newsfeed2025 #newstoday2025 #NewsUpdate
#sampadakexpress सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में मजदूरों के एक प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए दो प्रदर्शनकारियों के कथित तौर पर पुलिस हिरासत में टॉर्चर किए जाने से जुड़े एक मामले की सुनवाई की. जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन/भुयान की बेंच ने निर्देश दिया कि दोनों आरोपियों को कोर्ट के सामने पेश किया जाए, जिसके बाद कोर्ट ने उनसे सीधे बातचीत की. सुनवाई के दौरान, आरोपियों में से एक ने कोर्ट को बताया कि पुलिस हिरासत में रहते हुए उसे टॉर्चर किया गया था. इस पर जवाब देते हुए, जस्टिस नागरत्ना ने पूछा कि क्या दोनों व्यक्ति इस समय न्यायिक हिरासत में हैं, और टिप्पणी की कि यह याचिका अब असल में एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका में बदल गई है. सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्वेस ने कोर्ट में दलील दी कि, पुलिस द्वारा कथित टॉर्चर को देखते हुए, उन्हें डर है कि पुलिस उनके मुवक्किलों की और हिरासत मांग सकती है. उन्होंने तर्क दिया कि, हालांकि उनके मुवक्किलों से पूछताछ की जा सकती है, लेकिन उन्हें पुलिस हिरासत में नहीं भेजा जाना चाहिए.#SupremeCourt #Arrested #NoidaProtest #CustodialTorture #Resonates  #newsfeed2025 #newstoday2025 #NewsUpdate

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#sampadakexpress दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ टिप्पणी के लिए क्रिमिनल कंटेम्प्ट केस में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और अन्य से जवाब मांगा है. जस्टिस नवीन चावला और रविंदर डुडेजा की बेंच ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि 14 मई के ऑर्डर के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई है. सिंगल जज ने सोशल मीडिया पोस्ट और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक और पब्लिकेशन रिकॉर्ड से मिले मटीरियल पर भरोसा किया है. रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वे इसकी कॉपी संभालकर रखें और उन्हें इस कोर्ट के सामने रखें. कथित अवमानना करने वाले 4 हफ्ते में अपना जवाब फाइल कर सकते हैं. हालांकि, सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने कोई वकील पेश नहीं हुआ, फिर भी कोर्ट ने कहा कि मदद के लिए एक एमिकस अपॉइंट करेगा. दिल्ली हाईकोर्ट मामले में अगली सुनवाई सुनवाई 4 अगस्त को करेगा. बता दें कि आबकारी मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी करने के फैसले के खिलाफ CBI की याचिका पर सुनवाई कर रही जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने के लिए अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने मांग की थी. हालांकि, जस्टिस शर्मा ने 20 अप्रैल को उनकी केस से हटाने की अर्जी खारिज कर दी थी.#DelhiHC #ArvindKejriwal #ManishSisodia #Summoned #JusticeSwaranaKantaSharma  #newsfeed2025 #newstoday2025 #NewsUpdate
#sampadakexpress दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ टिप्पणी के लिए क्रिमिनल कंटेम्प्ट केस में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और अन्य से जवाब मांगा है. जस्टिस नवीन चावला और रविंदर डुडेजा की बेंच ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि 14 मई के ऑर्डर के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई है. सिंगल जज ने सोशल मीडिया पोस्ट और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक और पब्लिकेशन रिकॉर्ड से मिले मटीरियल पर भरोसा किया है. रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वे इसकी कॉपी संभालकर रखें और उन्हें इस कोर्ट के सामने रखें. कथित अवमानना करने वाले 4 हफ्ते में अपना जवाब फाइल कर सकते हैं. हालांकि, सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने कोई वकील पेश नहीं हुआ, फिर भी कोर्ट ने कहा कि मदद के लिए एक एमिकस अपॉइंट करेगा. दिल्ली हाईकोर्ट मामले में अगली सुनवाई सुनवाई 4 अगस्त को करेगा. बता दें कि आबकारी मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी करने के फैसले के खिलाफ CBI की याचिका पर सुनवाई कर रही जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने के लिए अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने मांग की थी. हालांकि, जस्टिस शर्मा ने 20 अप्रैल को उनकी केस से हटाने की अर्जी खारिज कर दी थी.#DelhiHC #ArvindKejriwal #ManishSisodia #Summoned #JusticeSwaranaKantaSharma #newsfeed2025 #newstoday2025 #NewsUpdate
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